ब्लग - साहित्य / मुक्तक

काली धेरै पाए




   प्रकृतिप्रेमी प्रेम प्रकाश - Nov 14 2017
काली धेरै पाए मुक्तक

काली धेरै पाए के भो गोरी पाइएन
आफुसंग ठिक्क हुने जोरी पाइएन

निश्वासिदै बाँचिरहे एक्लै आजसम्म
कुल,घरान,इज्जतकी छोरी पाइएन

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